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48 दिन बाद वीडियो कॉल से बच्चों को देखा, आंखें भर आई
उज्जैन. कोरोना के कारण शहर में फंसे कई लोग नगर निगम के रैन बसेरा में हैं। ये लोग अपने घर परिवार से लंबे समय से दूर हैं। निगम द्वारा इन्हें भोजन और अन्य सुविधाएं तो दी ही जा रही हैं, इसके साथ अब वे अपने परिवारजनों के साथ विडियो कॉल पर बात भी कर पा रहे हैं। इससे उन्हें अपने परिजनों को देखने की तसल्ली भी है।
निगम के शहर में 6 रैन बसेरा हैं। ये रैन बसेरा ऐसे लोगों के लिए ही हैं जो किसी काम से शहर में आए लेकिन ठहरने की कोई दूसरी व्यवस्था उनके पास नहीं है। वे रैन बसेरा में रात गुजार सकते हैं। ये रैन बसेरा अब उन लोगों के लिए आश्रय स्थल बने हुए हैं जो कोरोना के लॉकडाउन के कारण शहर में फंस गए।
परिजनों से बात कर भावुक हुए
लखनऊ के हरीसिंह वीडियो पर परिवार के साथ बातचीत करते भावुक हो गए। उनकी स्थिति को देखते आयुक्त ने उनके जाने की परमिशन कराई। फाजलपुरा रैन बसेरा के मेहरबानसिंह बताते हैं कि यहां 13 लोग रुके हैं। इनमें मुंबई, ग्वालियर, गुना, इंदौर, नागदा, सागर, भानपुरा, आगर के लोग हैं। 5 लोग ऐसे हैं जो यात्री हैं। बाकी वे लोग हैं जो मजदूरी के लिए आए थे और लॉकडाउन में फंस गए। वे लोग घर लौटना चाहते हैं लेकिन उन्हें परमिशन नहीं मिल पाई है। इधर मुंबई के हेयर स्टाइलिस्ट अमरसिंह राठौर 40 दिन से रैन बसेरा में है। वे भोपाल जा रहे थे। उज्जैन में दर्शन के लिए रुके तो लॉकडाउन हो गया। वे कहते हैं वीडियो कॉलिंग पर बात हुई थी। अच्छा लगा। अब लौटने का बंदोबस्त हो रहा है।
यहां पर तकलीफ तो नहीं लेकिन परिजनों की याद आती है
लॉकडाउन में फंसे लोगों को निगम ने आश्रय देने के साथ ही भोजन और अन्य सुविधाओं का प्रबंध किया है। निगमायुक्त ऋषि गर्ग बताते हैं लॉकडाउन में फंसे लोग लंबे समय से परिवार से दूर हैं। वे यहां तकलीफ में तो नहीं है लेकिन उन्हें परिजनों की याद आती है। उनकी भावनाओं को ध्यान में रख कर उन्हें वीडियो कॉल के माध्यम से घर-परिवार वालों से बातचीत की सुविधा शुरू की है। रैन बसेरा प्रभारी राजेश तिवारी के अनुसार 6 रैन बसेरा में 100 से ज्यादा लोग हैं। इनमें राजस्थान, पंजाब, गुजरात के भी लोग हैं।